क्योंकि मैं मृत्यु हूँ, मैं इंतज़ार नहीं करती।
मैं सदा से हूँ यहाँ, मैं ही हमेशा थी।
मैं पूछती नहीं, मुझे निमंत्रण नहीं चाहिए।
मैं बस आ जाती हूँ — बिना बताए, बिना बुलाए।
हालाँकि मैं अंत नहीं, परंतु प्रहर हूँ।
क्योंकि मैं मृत्यु हूँ – मैं इंतज़ार नहीं करती |
मैं सिर्फ अज्ञान का अंत हूँ।
जिसने समझा मुझे और जिया अपना पूरा जीवन सहजता में, उसके लिए मैं उत्सव हूँ।
डरो नहीं मुझसे।मैं तो आती हूँ तुम्हारे अज्ञान का नाश करने।
तुम डरो उससे, जिस जीवन में तुम्हें अज्ञान के सिवा बस भ्रम ही मिला, कुछ न मिला।
मैं सत्य नहीं, मैं तो बस यह बताने आती हूँ कि सत्य सिर्फ वही है — शाश्वत, निराकार, सबमें व्याप्त, साक्षात परमात्मा।
क्योंकि मैं मृत्यु हूँ – मैं इंतज़ार नहीं करती
मेरे आने से बस बदलता है बाहर का आवरण —
उसे कहो कपड़ा, या कहो त्वचा या फिर कहो शरीर |
जो बदलता नहीं, वह हमेशा से वहीं है – स्थिर है, वर्तमान में।
मैं आऊँगी किसी दिन बिना बताए तुमसे मिलने, एक सच्चे प्रेमी की तरह।
तुम मिले मुझे अगर जागे हुए, तो कर दूँगी तुम्हें मुक्त।
हो जाओगे तुम शून्य के पार।
यदि मिले सोए हुए तुम, तो फिर से एक नई यात्रा होगी।
एक जीवन के बाद फिर से मिलना होगा मुझसे।
क्योंकि मैं मृत्यु हूँ – मैं इंतज़ार नहीं करती।
बस इतनी ही मेरी गुज़ारिश है तुमसे —
आज, अभी, इसी वक्त, यहीं, जी भर कर जी लो।
सहजता और पूरी सजगता के साथ जीवन में नाचो।
अपनी हर श्वास को अंतिम मानो।
अपनी हर धड़कन को अंतिम समझो।
मिलो अपने जैसे किसी से, हर मिलन को अंतिम मानो।
हर प्रेम को प्रसाद समझो।
क्योंकि मैं मृत्यु हूँ – मैं इंतज़ार नहीं करती |
बीतने वाले हर क्षण को परमात्मा का प्रसाद समझो,
और स्वयं को प्रेम, परमात्मा, शून्यता और अनंत का यात्री मानो।
मेरे अलावा बस तुम्हीं सत्य हो, पहचानो स्वयं को ।
इस शरीर का, इस मन का, इस तन का घमंड मत करना।
यह तो निरा झूठा, गहन असत्य है।
ठहरूँगी नहीं, बस यही याद दिलाने चली आऊँगी जल्दी तुम्हारे पास।
क्योंकि मैं मृत्यु हूँ – मैं इंतज़ार नहीं करती।
इंतज़ार तो तुम्हारे अहंकार को है मेरा।
जिस दिन मन किया मेरा, चली आऊँगी तुम्हारे द्वार।
तोड़कर चूर्ण कर दूँगी तुम्हारे इस अहंकार के घड़े को,
जिसमें बसता है अज्ञानियों का संसार।
पूरा समझो स्वयं को।
जानो मुझे ही अपना मित्र।
क्योंकि मैं सिर्फ मृत्यु नहीं हूँ,
मैं चिरशक्ति हूँ, नृत्य करती चेतना हूँ,
ज्ञानियों के लिए उत्सव हूँ।
क्योंकि मैं मृत्यु हूँ – मैं इंतज़ार नहीं करती।