“माँ” @ Musafiri by PALAK J.

May 10, 2026by Tatva Krishna3

“माँ” 

आज फिर माँ की आँखों में सवाल थे, क्या कोख में इतने माह रखने के बाद भी बस पिता के नाम और वंश को ही चलाएगा उसका बेटा |

 

खुद के खून से मथकर मख्खन की तरह बने दूध पिलाने के बाद भी क्या उसका कोई वजूद कोई नाम नहीं |

 

बस पिता के नाम और वंश का उपनाम ही रहेगा उसके बेटे की पहचान |

क्या माँ का नाम, उसकी तपस्या और त्याग की कोई जगह नहीं इस झूठी दुनिया में……….तो फिर ठीक ही ऐसा कहना –

 

“माँ के नाम और त्याग को कोई मिटा नहीं पाया |

पिता के नाम और शान को कोइ छिपा नहीं पाया ||

माँ के प्यार और तपस्या की, हर धूप – हर छांव सुहानी है |

सदियों से मूक है माँ, बस यही कहानी है, बस यही कहानी है” ||

माँ केवल एक शब्द नहीं,
वह प्रेम, त्याग, ममता और जीवन की पहली गुरु होती हैं।
उनके बिना जीवन अधूरा है, क्योंकि माँ ही वह छाया है जो हर दुःख में सुकून देती है।

माँ किसी के भी जीवन में प्रेम का पहला अनुभव है ,

और प्रेम दरवाजा है परमात्मा तक पहुचने का |

मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाएँ।

परमात्मा  हर माँ को स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु बनाए। 

COPYRIGHT @TATVAKRISHNA

3 comments

  • Pardeep Pundir

    May 10, 2026 at 3:01 pm

    Bhau bhadiya likha h ,sandar

    Reply

  • Pardeep Pundir

    May 10, 2026 at 3:01 pm

    Sandar jandar bhaut bhadiya

    Reply

  • Raj singh

    May 10, 2026 at 3:21 pm

    Nice

    Reply

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