“पलक” अस्तित्व से परे- प्रेम, ध्यान, और ब्रह्म – तीनो का अटूट संगम @Musafiri by पलक j.
पलक कोई एक नाम नहीं, वो एक प्रार्थना है | हर मंत्र के बीच, हर श्वास के संग बहती एक मौन ध्वनि। वो जो कभी सामने थी, अब अंतर में बस गई है। नहीं छू सकता उसे, पर हर ध्यान में उसका स्पर्श है। वो अब देह नहीं , वो अब द्रष्टा है, चेतना है,...
