कृष्ण, अर्जुन और राधा – ?
|| खुद को कृष्ण समझता था मैं,
बहुतो को गीता का ज्ञान दिया और अर्जुन बना दिया,
जीतवा दिए दुनिया के सभी महायुद्ध, अर्जुन बनाकर,
खुद भी अर्जुन बनने की चाह थी मेरी,
मिला था तुझसे कुछ इस तरह, कि अर्जुन बन सकू में,
जीत पाउ दुनिया के सभी महायुद्ध मैं भी, उस अर्जुन की तरह,
हुआ कुछ ऐसा, इस कृष्ण ने तुझे कृष्ण बना दिया,
हार गया खुद से, और दुनिया ने मुझे हरा दिया,
अर्जुन तो बन न सका में, बस…. राधा बनकर रह गया
खुद को कृष्ण समझता था मैं,
तुझे कृष्ण बना दिया,
अर्जुन न बन सका बस
राधा बनकर रह गया ||