होलिका पर्व विशेष – होली के रंग गुरु के संग @musafiri by “शिष्य”

March 4, 2026by Tatva Krishna

गुलाल से चेहरा सजा जाता है, पर अंतर्मन सूना रह जाता है।
गुरु वचन का मधुर स्पर्श जीवन को सच्चा रंग दे जाता है।

 

अबीर की खुशबू तो क्षण भर रहती है,
पर गुरु का ज्ञान और संस्कार जीवन भर महकता है।

 

रंगों की बौछार तो सब पर होती है, पर मन को रंगना आसान नहीं।
जीवन का हर रंग फीका है, यदि उसमें गुरु कृपा नहीं।

 

अबीर हवा में उड़ जाता है, रंग जल में बह जाता है;
पर गुरु का उपदेश हृदय में बस जाता है।

 

रंगों की होली तो सब खेलते हैं
पर जीवन रंगना गुरु सीखाते हैं।

 

रंगों की चमक तो क्षणिक है,
पर गुरु का ज्ञान शाश्वत है।

 

रंग सजाते हैं तन को,
पर गुरु सजाते हैं मन को।

 

(Happy Holi Sir! Thank you for Being My Guru— From a Shishya)

(LOT OF THANKS AND INFINITIVE BLESSINGS TO YOU , FROM – TATVAKRISHNA)