बनारस के घाट और प्रेम, परमात्मा एवं शून्यता।
बनारस वो शहर जिसे काशी या वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है | यहाँ गंगा की पवित्र धारा, मंदिरों की घंटियाँ, दीपों की झिलमिलाहट, सारनाथ की शून्यता और प्रेम की वर्षा का संगम एक अद्भुत आध्यात्मिक दृश्य रच देता है।
गलियों और सडको में भटकते देश के विभिन्न कोनो से आये लोग बस परमात्मा की एक झलक पाने को तरसते है यहाँ |
पूरे ब्रह्माण्ड में न तो अध्यात्म से बड़ा कोई विज्ञान है, न ही शून्यता से बड़ा कोई शिखर |
यह भी सच है परमात्मा को पाने का बस एक ही रास्ता है प्रेम , प्रेम और सिर्फ प्रेम |
प्रेम जब दुनिया के सबसे गहरे विज्ञान – अध्यात्म की गहराई को छू लेता है, और दुनिया के सबसे ऊँचे शिखर – शून्यता के शिखर को प्राप्त कर लेता है तो निश्चित ही उसे परमात्मा की प्राप्ति हो जाती है |
ये वही परमात्मा है, जिसको पाने के लिए लोग यहाँ वहां भटकते है, परन्तु वो बसता है कण कण में, वो बसता है हर प्राणी के अपने ही अंतर्मन में |
इस परमात्मा की एकमात्र भाषा ही है प्रेम, और केवल मौन में बसता है ये प्रेम |
यहाँ बनारस के घाटो पर अध्यात्म के रूप में साक्षात् नाचता है ये प्रेम, और वहां सारनाथ के स्तूप पर शून्यता के रूप में साक्षात् विराजता है ये प्रेम | प्रेम यहाँ उत्सव है नाचता, गाता, थिरकता, धड़कता, सरोबार सा परमात्मा के रूप में |
इसे प्रेम कहो या फिर परमात्मा, या कहो शांति या शुन्यता, या फिर कोई मुस्कराहट |
यह तो सिर्फ अस्तित्व का सच्चा पहलू है –
जो समय में बसता है, समय में मिटता है, समय में बनता है, समय में गायब हो जाता है |
बनारस के घाटों पर प्रेम बरसता है —
गंगा की लहरों में रिमझिम फुहार-सा।प्रेम नाचता है — दीपों की लौ में,
आरती की थाप में, साधु की मुस्कान-सा।प्रेम गूंजता है — मंदिर की घंटियों में,
शंख की ध्वनि में, मन की अनाहद तान-सा।यहाँ हर कण में प्रेम है, हर क्षण में अनुग्रह,
बनारस का घाट तो स्वयं प्रेम का उत्सव है।सारनाथ की वाणी में शून्यता भी बोलती है,
मौन में छुपा सत्य हृदय को डोलती है।वही शून्य है मार्ग, वही शून्य है सार,
जहाँ बुद्ध ने पाया शांति का उपहार।प्रेम है परमात्मा की भाषा,
जहाँ अहं मिटकर समर्पण जागे।परमात्मा है शून्यता का विस्तार,
जहाँ सब कुछ है — और कुछ भी नहीं।शून्यता है प्रेम का मौन,
जिसमें ब्रह्मांड गूंजता है अनाहद।तीनों मिलकर रचते हैं सिर्फ एक ही सत्य — जहाँ मन मुक्त है …. पूर्ण समर्पण के साथ , और अस्तित्व पूर्ण भी, एक मोन सा, एक जीवन सा ।